आदतन तुमने कर दिये वादे,
आदतन हमनेँ भी ऐतबार किया,
तेरी राहोँ मेँ हर बार रुककर,
हमनेँ अपना ही इंतजार किया…”
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धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती ,
रात ढलती नहीं थम जाती है ,
सर्द मौसम की एक दिक्कत है ,
याद तक जम के बैठ जाती है…..!

तैयार रहते हैं पलकों पे आंसू हर लम्हे ,
तेरी याद का कोई वक़्त मुक़र्रर जो नहीं …!!!

प्यार का नाम सूना करता था
एक दिन प्यार मुझे भी हो गया
 
प्यार में लोगो को पागल होते सुना था
प्यार में एक दिन मै भी पागल हो गया
 
दिन में उसके यादों में रहता था
और रात में उसके सवालों में रहता था
 
दिन में अजब सी ख़ुशी थी,
उसके फोन का इंतजार रहता था
एक मिस काल के खातिर
फोन दिन भर हाथ में रहता था
 
फिर एक दिन एक काल ऐसा आया ,
कि मेरी शादी होने वाली हैं
अब तक जो भी हमारे बिच था ,
नादानी थी और सपना था
 
अब तुम मुझ को भूल जाओ ,
अब ना तुम मुझें याद आओ
अब मुझे सच्चा दिलदार मिल गया ,
मुझे मेरा प्यार मिल गया
एक अंश भी नहीं मेरा वो
जिस किरदार को तुमने मेरे नाम से पहचाना है,
मेरी हकीक़त है अंत का वो हिस्सा
जो पूरी किताब पढ़ बोहोत कम ने ही जाना है..
Sunil Bhatt
मुझे तू माफ़ करना खुदा
कभी तुम्हारे दर नहीं आ पाये ,
ख़ुदा जब से उसको माना है
कोई कैसे उधर जाये ,